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Hanuman Ashtottara Sata Namavali – Meaning

No Comments 24 March 2012

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No Comments 23 March 2012

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Hanuman Chalisa – Meaning

No Comments 22 March 2012

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Author: tulasī dās

 
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Hindi

Hanuman Ashtottara Sata Namavali – Hindi

No Comments 04 August 2011

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This stotram is in सरल दॆवनागरी(हिंन्दी). View this in शुद्ध दॆवनागरी (Samskritam), with appropriate anuswaras marked.
 
ॐ श्री आंजनेयाय नमः
ॐ महावीराय नमः
ॐ हनुमते नमः
ॐ सीतादेवि मुद्राप्रदायकाय नमः
ॐ मारुतात्मजाय नमः
ॐ तत्त्वज्ञानप्रदाय नमः
ॐ अशोकवनिकाच्चेत्रे नमः
ॐ सर्वबंध विमोक्त्रे नमः
ॐ रक्षोविध्वंसकारकायनमः
ॐ परविद्वप नमः
ॐ परशौर्य विनाशनाय नमः
ॐ परमंत्र निराकर्त्रे नमः
ॐ परमंत्र प्रभेवकाय नमः
ॐ सर्वग्रह विनाशिने नमः
ॐ भीमसेन सहायकृते नमः
ॐ सर्वदुःख हराय नमः
ॐ सर्वलोक चारिणे नमः
ॐ मनोजवाय नमः
ॐ पारिजात धृममूलस्धाय नमः
ॐ सर्वमंत्र स्वरूपवते नमः
ॐ सर्वयंत्रात्मकाय नमः
ॐ सर्वतंत्र स्वरूपिणे नमः
ॐ कपीश्वराय नमः
ॐ महाकायाय नमः
ॐ सर्वरोगहराय नमः
ॐ प्रभवे नमः
ॐ बलसिद्धिकराय नमः
ॐ सर्व विद्यासंपत्र्प वायकाय नमः
ॐ कपिसेना नायकाय नमः
ॐ भविष्यच्चतु राननाय नमः
ॐ कूमार ब्रह्मचारिणे नमः
ॐ रत्नकुंडल दीप्तिमते नमः
ॐ चंचल द्वाल सन्नद्धलंबमान शिखोज्वलाय नमः
ॐ गंध्र्व विद्यातत्वज्ञाय नमः
ॐ महाबलपराक्रमाय नमः
ॐ कारागृह विमोक्त्रे नमः
ॐ शृंखल बंध विमोचकाय नमः
ॐ सागरोत्तारकाय नमः
ॐ प्राज्ञाय नमः
ॐ रामदूताय नमः
ॐ प्रतापवते नमः
ॐ वानराय नमः
ॐ केसरिसुताय नमः
ॐ सीताशोक निवारणाय नमः
ॐ अंजना गर्भसंभुताय नमः
ॐ बालर्क सदृशाननाय नमः
ॐ विभीषण प्रियकराय नमः
ॐ दशग्रीव कुलांतकाय नमः
ॐ लक्ष्मण प्राणदात्रे नमः
ॐ वज्रकायाय नमः
ॐ महाद्युतये नमः
ॐ चिरंजीविने नमः
ॐ रामभक्ताय नमः
ॐ द्तेत्यकार्य विघातकाय नमः
ॐ अक्षहंत्रे नमः
ॐ कांचनाभाय नमः
ॐ पंचवक्त्राय नमः
ॐ महातपसे नमः
ॐ लंकिणेभंजनाय नमः
ॐ गंधमादन श्तेल नमः
ॐ लंकापुर विदाहकाय नमः
ॐ सुग्रीव सचिवाय नमः
ॐ धीराय नमः
ॐ शूराय नमः
ॐ द्तेत्यकुलांतकाय नमः
ॐ सुरार्चिताय नमः
ॐ महातेजसे नमः
ॐ राम चूडामणि प्रदाय कामरूपिवे नमः
ॐ श्री पिंगलाक्षाय नमः
ॐ नार्धि ंते नाक नमः
ॐ कबलीकृत मार्तांडमंडलाय नमः
ॐ कबलीकृत मार्तांड नमः
ॐ विजितेंद्रियाय नमः
ॐ रामसुग्रीव संदात्रे नमः
ॐ महारावण मर्धनाय नमः
ॐ स्पटिका भाय नमः
ॐ वाग धीशाय नमः
ॐ नव व्याकृति पंडिताय नमः
ॐ चतुर्भाहवे नमः
ॐ दीनबंधवे नमः
ॐ महत्मने नमः
ॐ भक्त वत्सलाय नमः
ॐ संजीवन नगा हर्त्रे नमः
ॐ शुचये नमः
ॐ वाग्मिने नमः
ॐ दृढव्रताय नमः
ॐ कालनेमि प्रमधनाय नमः
ॐ हरिमर्कट मर्कटायनमः
ॐ दांताय नमः
ॐ शांताय नमः
ॐ प्रसन्नात्मने नमः
ॐ शतकंठ मदावहृतेनमः
ॐ योगिने नमः
ॐ रामकधालोलाय नमः
ॐ सीतान्वेषण पंडिताय नमः
ॐ वज्र नखाय नमः
ॐ रुद्रवीर्य समुद्भवाय नमः
ॐ इंद्र जित्प्र्रहिता मोघब्रह्मस्त्र विनिवार काय नमः
ॐ पार्ध ध्वजाग्र संवासिने नमः
ॐ शरपंजर भेदकाय नमः
ॐ दशबाहवे नमः
ॐ लोकपूज्याय नमः
ॐ जां वत्प्र ति वर्धनाय नमः
ॐ सीत सवेत श्रीरामपाद सेवा दुरंधराय नमः

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Anjaneya Dandakam – Hindi

No Comments 04 August 2011

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श्री आंजनेयं प्रसन्नांजनेयं
प्रभादिव्यकायं प्रकीर्ति प्रदायं
भजे वायुपुत्रं भजे वालगात्रं भजेहं पवित्रं
भजे सूर्यमित्रं भजे रुद्ररूपं
भजे ब्रह्मतेजं बटंचुन् प्रभातंबु
सायंत्रमुन् नीनामसंकीर्तनल् जेसि
नी रूपु वर्णिंचि नीमीद ने दंडकं बोक्कटिन् जेय
नी मूर्तिगाविंचि नीसुंदरं बेंचि नी दासदासुंडवै
रामभक्तुंडनै निन्नु नेगोल्चेदन्
नी कटाक्षंबुनन् जूचिते वेडुकल् चेसिते
ना मोरालिंचिते नन्नु रक्षिंचिते
अंजनादेवि गर्भान्वया देव
निन्नेंच नेनेंतवाडन्
दयाशालिवै जूचियुन् दातवै ब्रोचियुन्
दग्गरन् निल्चियुन् दोल्लि सुग्रीवुकुन्-मंत्रिवै
स्वामि कार्यार्थमै येगि
श्रीराम सौमित्रुलं जूचि वारिन्विचारिंचि
सर्वेशु बूजिंचि यब्भानुजुं बंटु गाविंचि
वालिनिन् जंपिंचि काकुत्थ्स तिलकुन् कृपादृष्टि वीक्षिंचि
किष्किंधकेतेंचि श्रीराम कार्यार्थमै लंक केतेंचियुन्
लंकिणिन् जंपियुन् लंकनुन् गाल्चियुन्
यभ्भूमिजं जूचि यानंदमुप्पोंगि यायुंगरंबिच्चि
यारत्नमुन् देच्चि श्रीरामुनकुन्निच्चि संतोषमुन्‌जेसि
सुग्रीवुनिन् यंगदुन् जांबवंतु न्नलुन्नीलुलन् गूडि
यासेतुवुन् दाटि वानरुल्‍मूकलै पेन्मूकलै
यादैत्युलन् द्रुंचगा रावणुंडंत कालाग्नि रुद्रुंडुगा वच्चि
ब्रह्मांडमैनट्टि या शक्तिनिन्‍वैचि यालक्षणुन् मूर्छनोंदिंपगानप्पुडे नीवु
संजीविनिन्‍देच्चि सौमित्रिकिन्निच्चि प्राणंबु रक्षिंपगा
कुंभकर्णादुल न्वीरुलं बोर श्रीराम बाणाग्नि
वारंदरिन् रावणुन् जंपगा नंत लोकंबु लानंदमै युंड
नव्वेलनु न्विभीषुणुन् वेडुकन् दोडुकन् वच्चि पट्टाभिषेकंबु चेयिंचि,
सीतामहादेविनिन् देच्चि श्रीरामुकुन्निच्चि,
यंतन्नयोध्यापुरिन्‍जोच्चि पट्टाभिषेकंबु संरंभमैयुन्न
नीकन्न नाकेव्वरुन् गूर्मि लेरंचु मन्निंचि श्रीरामभक्त प्रशस्तंबुगा
निन्नु सेविंचि नी कीर्तनल् चेसिनन् पापमुल्‍ल्बायुने भयमुलुन्
दीरुने भाग्यमुल् गल्गुने साम्राज्यमुल् गल्गु संपत्तुलुन् कल्गुनो
वानराकार योभक्त मंदार योपुण्य संचार योधीर योवीर
नीवे समस्तंबुगा नोप्पि यातारक ब्रह्म मंत्रंबु पठियिंचुचुन् स्थिरम्मुगन्
वज्रदेहंबुनुन् दाल्चि श्रीराम श्रीरामयंचुन् मनःपूतमैन एप्पुडुन् तप्पकन्
तलतुना जिह्वयंदुंडि नी दीर्घदेहम्मु त्रैलोक्य संचारिवै राम
नामांकितध्यानिवै ब्रह्मतेजंबुनन् रौद्रनीज्वाल
कल्लोल हावीर हनुमंत ॐकार शब्दंबुलन् भूत प्रेतंबुलन् बेन्
पिशाचंबुलन् शाकिनी ढाकिनीत्यादुलन् गालिदय्यंबुलन्
नीदु वालंबुनन् जुट्टि नेलंबडं गोट्टि नीमुष्टि घातंबुलन्
बाहुदंडंबुलन् रोमखंडंबुलन् द्रुंचि कालाग्नि
रुद्रुंडवै नीवु ब्रह्मप्रभाभासितंबैन नीदिव्य तेजंबुनुन् जूचि
रारोरि नामुद्दु नरसिंह यन्‍चुन् दयादृष्टि
वीक्षिंचि नन्नेलु नास्वामियो यांजनेया
नमस्ते सदा ब्रह्मचारी
नमस्ते नमोवायुपुत्रा नमस्ते नमः

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No Comments 04 August 2011

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रचन: तुलसी दास्

दोहा
श्री गुरु चरन सरोज रज निजमनु मुकुरु सुधारि ।
बरनऊ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥
बुद्धिहीन ननु जानिके सुमिरौ पवन कुमार ।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु कलेस बिकार् ॥

ध्यानम्
गोष्पदीकृत वाराशिं मशकीकृत राक्षसम् ।
रामायण महामाला रत्नं वंदे अनिलात्मजम् ॥
यत्र यत्र रघुनाथ कीर्तनं तत्र तत्र कृतमस्त कांजलिम् ।
भाष्पवारि परिपूर्ण लोचनं मारुतिं नमत राक्षसांतकम् ॥

चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर ।
जय कपीश तिहु लोक उजागर ॥ १ ॥

रामदूत अतुलित बलधामा ।
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ॥ २ ॥

महावीर विक्रम बजरंगी ।
कुमति निवार सुमति के संगी ॥३ ॥

कंचन वरण विराज सुवेशा ।
कानन कुंडल कुंचित केशा ॥ ४ ॥

हाथवज्र औ ध्वजा विराजै ।
कांथे मूंज जनेऊ साजै ॥ ५॥

शंकर सुवन केसरी नंदन ।
तेज प्रताप महाजग वंदन ॥ ६ ॥

विद्यावान गुणी अति चातुर ।
राम काज करिवे को आतुर ॥ ७ ॥

प्रभु चरित्र सुनिवे को रसिया ।
रामलखन सीता मन बसिया ॥ ८॥

सूक्ष्म रूपधरि सियहिं दिखावा ।
विकट रूपधरि लंक जरावा ॥ ९ ॥

भीम रूपधरि असुर संहारे ।
रामचंद्र के काज संवारे ॥ १० ॥

लाय संजीवन लखन जियाये ।
श्री रघुवीर हरषि उर लाये ॥ ११ ॥

रघुपति कीन्ही बहुत बडाई ।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥ १२ ॥

सहस वदन तुम्हरो जास गावै ।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै ॥ १३ ॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा ।
नारद शारद सहित अहीशा ॥ १४ ॥

जम(यम) कुबेर दिगपाल जहां ते ।
कवि कोविद कहि सके कहां ते ॥ १५ ॥

तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा ।
राम मिलाय राजपद दीन्हा ॥ १६ ॥

तुम्हरो मंत्र विभीषण माना ।
लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥ १७ ॥

युग सहस्र योजन पर भानू ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ १८ ॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही ।
जलधि लांघि गये अचरज नाही ॥ १९ ॥

दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥ २० ॥

राम दुआरे तुम रखवारे ।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥ २१ ॥

सब सुख लहै तुम्हारी शरणा ।
तुम रक्षक काहू को डर ना ॥ २२ ॥

आपन तेज तुम्हारो आपै ।
तीनों लोक हांक ते कांपै ॥ २३ ॥

भूत पिशाच निकट नहि आवै ।
महवीर जब नाम सुनावै ॥ २४ ॥

नासै रोग हरै सब पीरा ।
जपत निरंतर हनुमत वीरा ॥ २५ ॥

संकट तें(सें) हनुमान छुडावै ।
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ॥ २६ ॥

सब पर राम तपस्वी राजा ।
तिनके काज सकल तुम साजा ॥ २७ ॥

और मनोरध जो कोइ लावै ।
सोई अमित जीवन फल पावै ॥ २८ ॥

चारो युग परिताप तुम्हारा ।
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥ २९ ॥

साधु संत के तुम रखवारे ।
असुर निकंदन राम दुलारे ॥ ३० ॥

अष्ठसिद्धि नौ(नव) निधि के दाता ।
अस वर दीन्ह जानकी माता ॥ ३१ ॥

राम रसायन तुम्हारे पासा ।
साद रहो रघुपति के दासा ॥ ३२ ॥

तुम्हरे भजन रामको पावै ।
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥ ३३ ॥

अंत काल रघुवर पुरजाई ।
जहां जन्म हरिभक्त कहाई ॥ ३४ ॥

और देवता चित्त न धरई ।
हनुमत सेइ सर्व सुख करई ॥ ३५ ॥

संकट कटै मिटै सब पीरा ।
जो सुमिरै हनुमत बल वीरा ॥ ३६ ॥

जै जै जै हनुमान गोसाई ।
कृपा करो गुरुदेव की नाई ॥ ३७ ॥

जो शत वार पाठ कर कोई ।
छूटहि बंदि महा सुख होई ॥ ३८ ॥

जो यह पडै हनुमान चालीसा ।
होय सिद्धि साखी गौरीशा ॥ ३९ ॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा ।
कीजै नाथ हृदय मह डेरा ॥ ४० ॥

दोहा
पवन तनय संकट हरण – मंगल मूरति रूप् ।
राम लखन सीता सहित – हृदय बसहु सुरभूप् ॥
सियावर रामचंद्रकी जय । पवनसुत हनुमानकी जय । बोलो भाई सब संतनकी जय ।

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1 Comment 21 March 2011

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Hanuman Ashtottara Sata Namavali – ShuddhaKannada

No Comments 26 February 2011

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This stotram is in ಶುದ್ಧ ಕನ್ನಡ. View this in ಸರಳ ಕನ್ನಡ, with simplified anuswaras for easy reading.
 
ಓಂ ಶ್ರೀ ಆಞ್ಜನೇಯಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಮಹಾವೀರಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಹನುಮತೇ ನಮಃ
ಓಂ ಸೀತಾದೇವಿ ಮುದ್ರಾಪ್ರದಾಯಕಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಮಾರುತಾತ್ಮಜಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ತತ್ತ್ವಙ್ಞಾನಪ್ರದಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಅಶೊಕವನಿಕಾಚ್ಚೇತ್ರೇ ನಮಃ
ಓಂ ಸರ್ವಬನ್ಧ ವಿಮೋಕ್ತ್ರೇ ನಮಃ
ಓಂ ರಕ್ಷೋವಿಧ್ವಂಸಕಾರಕಾಯನಮಃ
ಓಂ ಪರವಿದ್ವಪ ನಮಃ
ಓಂ ಪರಶೌರ್ಯ ವಿನಾಶನಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಪರಮನ್ತ್ರ ನಿರಾಕರ್ತ್ರೇ ನಮಃ
ಓಂ ಪರಮನ್ತ್ರ ಪ್ರಭೇವಕಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಸರ್ವಗ್ರಹ ವಿನಾಶಿನೇ ನಮಃ
ಓಂ ಭೀಮಸೇನ ಸಹಾಯಕೃತೇ ನಮಃ
ಓಂ ಸರ್ವದುಃಖ ಹರಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಸರ್ವಲೋಕ ಚಾರಿಣೇ ನಮಃ
ಓಂ ಮನೋಜವಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಪಾರಿಜಾತ ಧೃಮಮೂಲಸ್ಧಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಸರ್ವಮನ್ತ್ರ ಸ್ವರೂಪವತೇ ನಮಃ
ಓಂ ಸರ್ವಯನ್ತ್ರಾತ್ಮಕಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಸರ್ವತನ್ತ್ರ ಸ್ವರೂಪಿಣೇ ನಮಃ
ಓಂ ಕಪೀಶ್ವರಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಮಹಾಕಾಯಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಸರ್ವರೋಗಹರಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಪ್ರಭವೇ ನಮಃ
ಓಂ ಬಲಸಿದ್ಧಿಕರಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಸರ್ವ ವಿದ್ಯಾಸಮ್ಪತ್ರ್ಪ ವಾಯಕಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಕಪಿಸೇನಾ ನಾಯಕಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಭವಿಷ್ಯಚ್ಚತು ರಾನನಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಕೂಮಾರ ಬ್ರಹ್ಮಚಾರಿಣೇ ನಮಃ
ಓಂ ರತ್ನಕುಣ್ಡಲ ದೀಪ್ತಿಮತೇ ನಮಃ
ಓಂ ಚಞ್ಚಲ ದ್ವಾಲ ಸನ್ನದ್ಧಲಮ್ಬಮಾನ ಶಿಖೋಜ್ವಲಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಗನ್ಧ್ರ್ವ ವಿದ್ಯಾತತ್ವಙ್ಞಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಮಹಾಬಲಪರಾಕ್ರಮಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಕಾರಾಗೃಹ ವಿಮೋಕ್ತ್ರೇ ನಮಃ
ಓಂ ಶೃಙ್ಖಲ ಬನ್ಧ ವಿಮೋಚಕಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಸಾಗರೋತ್ತಾರಕಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಪ್ರಾಙ್ಞಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ರಾಮದೂತಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಪ್ರತಾಪವತೇ ನಮಃ
ಓಂ ವಾನರಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಕೇಸರಿಸುತಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಸೀತಾಶೋಕ ನಿವಾರಣಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಅಞ್ಜನಾ ಗರ್ಭಸಮ್ಭುತಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಬಾಲರ್ಕ ಸದೃಶಾನನಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ವಿಭೀಷಣ ಪ್ರಿಯಕರಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ದಶಗ್ರೀವ ಕುಲಾನ್ತಕಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಲಕ್ಷ್ಮಣ ಪ್ರಾಣದಾತ್ರೇ ನಮಃ
ಓಂ ವಜ್ರಕಾಯಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಮಹಾದ್ಯುತಯೇ ನಮಃ
ಓಂ ಚಿರಞ್ಜೀವಿನೇ ನಮಃ
ಓಂ ರಾಮಭಕ್ತಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ದ್ತೆತ್ಯಕಾರ್ಯ ವಿಘಾತಕಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಅಕ್ಷಹನ್ತ್ರೇ ನಮಃ
ಓಂ ಕಾಞ್ಚನಾಭಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಪಞ್ಚವಕ್ತ್ರಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಮಹಾತಪಸೇ ನಮಃ
ಓಂ ಲಙ್ಕಿಣೇಭಞ್ಜನಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಗನ್ಧಮಾದನ ಶ್ತೆಲ ನಮಃ
ಓಂ ಲಙ್ಕಾಪುರ ವಿದಾಹಕಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಸುಗ್ರೀವ ಸಚಿವಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಧೀರಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಶೂರಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ದ್ತೆತ್ಯಕುಲಾನ್ತಕಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಸುರಾರ್ಚಿತಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಮಹಾತೇಜಸೇ ನಮಃ
ಓಂ ರಾಮ ಚೂಡಾಮಣಿ ಪ್ರದಾಯ ಕಾಮರೂಪಿವೇ ನಮಃ
ಓಂ ಶ್ರೀ ಪಿಙ್ಗಳಾಕ್ಷಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ನಾರ್ಧಿ ನ್ತೇ ನಾಕ ನಮಃ
ಓಂ ಕಬಲೀಕೃತ ಮಾರ್ತಾಣ್ಡಮಣ್ಡಲಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಕಬಲೀಕೃತ ಮಾರ್ತಾಣ್ಡ ನಮಃ
ಓಂ ವಿಜಿತೇನ್ದ್ರಿಯಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ರಾಮಸುಗ್ರೀವ ಸನ್ದಾತ್ರೇ ನಮಃ
ಓಂ ಮಹಾರಾವಣ ಮರ್ಧನಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಸ್ಪಟಿಕಾ ಭಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ವಾಗ ಧೀಶಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ನವ ವ್ಯಾಕೃತಿ ಪಣ್ಡಿತಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಚತುರ್ಭಾಹವೇ ನಮಃ
ಓಂ ದೀನಬನ್ಧವೇ ನಮಃ
ಓಂ ಮಹತ್ಮನೇ ನಮಃ
ಓಂ ಭಕ್ತ ವತ್ಸಲಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಸಞ್ಜೀವನ ನಗಾ ಹರ್ತ್ರೇ ನಮಃ
ಓಂ ಶುಚಯೇ ನಮಃ
ಓಂ ವಾಗ್ಮಿನೇ ನಮಃ
ಓಂ ದೃಢವ್ರತಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಕಾಲನೇಮಿ ಪ್ರಮಧನಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಹರಿಮರ್ಕಟ ಮರ್ಕಟಾಯನಮಃ
ಓಂ ದಾನ್ತಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಶಾನ್ತಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಪ್ರಸನ್ನಾತ್ಮನೇ ನಮಃ
ಓಂ ಶತಕಣ್ಠ ಮದಾವಹೃತೇನಮಃ
ಓಂ ಯೋಗಿನೇ ನಮಃ
ಓಂ ರಾಮಕಧಾಲೋಲಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಸೀತಾನ್ವೇಷಣ ಪಣ್ಡಿತಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ವಜ್ರ ನಖಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ರುದ್ರವೀರ್ಯ ಸಮುದ್ಭವಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಇನ್ದ್ರ ಜಿತ್ಪ್ರ್ರಹಿತಾ ಮೋಘಬ್ರಹ್ಮಸ್ತ್ರ ವಿನಿವಾರ ಕಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಪಾರ್ಧ ಧ್ವಜಾಗ್ರ ಸಂವಾಸಿನೇ ನಮಃ
ಓಂ ಶರಪಞ್ಜರ ಭೇದಕಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ದಶಬಾಹವೇ ನಮಃ
ಓಂ ಲೋಕಪೂಜ್ಯಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಜಾಂ ವತ್ಪ್ರ ತಿ ವರ್ಧನಾಯ ನಮಃ
ಓಂ ಸೀತ ಸವೇತ ಶ್ರೀರಾಮಪಾದ ಸೇವಾ ದುರನ್ಧರಾಯ ನಮಃ

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ನಿತ್ಯ ಪಾರಾಯಣ ಶ್ಲೋಕಾಃ

ರಾಮ ರಕ್ಷಾ ಸ್ತೋತ್ರಮ್

ಶ್ರೀ ರಾಮ ಪಞ್ಚ ರತ್ನ ಸ್ತೋತ್ರಮ್

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