Devanagari,Sanskrit,Hindi

Rudra Ashtakam – Devanagari

0 Comments 23 December 2010

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This stotram is in शुद्ध दॆवनागरी (Samskritam). View this in सरल दॆवनागरी (हिंन्दी), with simplified anuswaras for easy reading.
 
नमामीश मीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेद स्वरूपम् ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चदाकाश माकाशवासं भजेहम् ॥

निराकार मोङ्कार मूलं तुरीयं गिरिज्ञान गोतीत मीशं गिरीशम् ।
करालं महाकालकालं कृपालं गुणागार संसारसारं नतो हम् ॥

तुषाराद्रि सङ्काश गौरं गम्भीरं मनोभूतकोटि प्रभा श्रीशरीरम् ।
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगाङ्गं लस्त्फालबालेन्दु भूषं महेशम् ॥

चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालुम् ।
मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि ॥

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशम् अखण्डम् अजं भानुकोटि प्रकाशम् ।
त्रयी शूल निर्मूलनं शूलपाणिं भजेहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥

कलातीत कल्याण कल्पान्तरी सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ।
चिदानन्द सन्दोह मोहापकारी प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मधारी ॥

न यावद् उमानाथ पादारविन्दं भजन्तीह लोके परे वा नाराणाम् ।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवास ॥

नजानामि योगं जपं नैव पूजां नतो हं सदा सर्वदा देव तुभ्यम् ।
जराजन्म दुःखौघतातप्यमानं प्रभोपाहि अपन्नमीश प्रसीद! ॥

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