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Jatiki Oopiri Swatantryam – Devanagari

Comments Off on Jatiki Oopiri Swatantryam – Devanagari 14 August 2011

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This stotram is in शुद्ध दॆवनागरी (Samskritam). View this in सरल दॆवनागरी (हिंन्दी), with simplified anuswaras for easy reading.
 

रचन: सि. नारायण रेद्दि

जातिकि ऊपिरि स्वातन्त्र्यं, अदि ज्योतिग वेलिगे चैतन्यं
आ चैतन्यं निलिचिन नाडे समस्त जगतिकि सौभाग्यम् ॥

शिखरंला , प्रति मनिषी, शिरसेत्तिन नाडे,
जलनिधिला प्रति हृदयम् अललेत्तिन नाडे,
मानव जीवन गमनंलो मायनि वेलुगुल महोदयम् ॥

एप्पटि एप्पटि रुचिरस्वप्नं, ई स्वातन्त्र्यं
एन्दरि एन्दरि त्याग फलं, ई स्वातन्त्र्यं
अन्दक अन्दक अन्दिन फलमुनु अन्दरिकी अन्दिव्वण्डि ॥

स्वराज्य सिद्धिकि लक्ष्यमेमिटो स्मरिञ्चुकोण्डि
जाति विधात विनूत्न फलालनु साधिञ्चण्डि
समस्यलन्नी परिष्करिञ्चे सौम्य मार्गं चूपण्डि ॥

कलतलु कक्षलु रेपोद्दु ए कुलं पेरुतो
मारण होमं जरपोद्दु ए मतं मुसुगुलो
समैक्य भारत सौधाग्रं पै, शान्ति दीपं निलपण्डि ॥

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