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E Desamegina – Devanagari

Comments Off on E Desamegina – Devanagari 26 April 2011

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This stotram is in शुद्ध दॆवनागरी (Samskritam). View this in सरल दॆवनागरी (हिंन्दी), with simplified anuswaras for easy reading.
 

रचन: रायप्रोलु सुब्बारावु

ए देशमेगिना एन्दु कालेडिना
ए पीठमेक्किना, एव्वरेमनिना,
पोगडरा नी तल्लि भूमि भारतिनि,
निलपरा नी जाति निण्डु गौरवमु.

ए पूर्व पुण्यमो, ए योग बलमो
जनियिञ्चिनाड वी स्वर्गखण्डमुन
ए मञ्चिपूवुलन् प्रेमिञ्चिनावो
निनु मोचे ई तल्लि कनक गर्भमुन.

लेदुरा इटुवण्टि भूदेवि येन्दू
लेरुरा मनवण्टि पौरुलिङ्केन्दु.
सूर्युनी वेलुतुरुल् सोकुनन्दाक,
ओडला झण्डालु आडुनन्दाक,
अन्दाक गल ई अनन्त भूतलिनि
मन भूमि वण्टि चल्लनि तल्लि लेदु
पाडरा नी वीर भाव भारतमु.

तम तपस्सुलु ऋषुल् धारवोयङ्गा
सौर्य हारमुल् राजचन्द्रुलर्पिम्प
भाव सूत्रमु कवि प्रभुवुलल्लङ्ग
राग दुग्धमुल् भक्तरत्नमुल् पिदक

दिक्कुलकेगदन्नु तेजम्मु वेलग
राल्ल तेनियलूरु रागालु सागा
जगमुलनूगिञ्चु मगतनम्बेगय
सौन्दर्यमेग बोयु साहित्यमलर

वेलिगिनदी दिव्य विश्वम्बुपुत्र
दीविञ्चे नी दिव्य देशम्बु पुत्र
पोलमुला रत्नालु मोलिचेरा इचट
वार्धिलो मुत्यालु पण्डेरा इचट

पृथिवि दिव्यौषधुल् पिदिकेरा मनकू
कानला कस्तूरि काचरा मनकु.

अवमानमेलरा ? अनुमानमेलरा ?
भारतेयुडनञ्चु भक्तितो पाड!

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